ईश्वर महान हैं ।
ईश्वरीय शक्ति के अमोघ शास्त्र को समझना मुश्किल हैं, लेकिन महसूस करना संभव हैं। ईश्वर की रंगत उसकी अद्भुत प्राकृतिक पूर्णता का हरदम स्विकार ही आनन्द हैं।
विचार-कल्पना-समस्या-पीडाओं से उपर उठकर ईश्वर की संभावनाओं पर विचार करना चाहिए। मैं अभी जो कर्म कर रहा हूं, थोड़ी देर बाद आपकी आंखो के सामने ओर आपकी मन-मस्तिष्क में आनंद कल्पना बन जायेगी। ये विचार व्यापार की घटना घटित हुई उसके नियमन में भी लिखाई-पढाई और विचार संक्रमण प्रक्रिया में भी ईश्वर ही कारण भूत हैं। विश्व कई घटनाओं के बारें में यही ईश्वरीय संभावनाए निहित हैं। मनुष्य के रूप में साक्षी भाव ही हमारी वर्तनी हैं। इस साक्षीभाव का ईश्वर के साथ सख्य भाव निर्माण हो इसलिए हमें तैयार होना होगा। मुझे व्यक्तिगत रूप में ईश्वर अनुभूति का अदृश्य हो कर भी अद्भुत दृश्य भाव लगता हैं।
मूर्ति के दर्शन से हमारा ईश्वरीय दृश्य भाव संतुष्ट होता हैं। साथ अदृश्य भाव से हमारा शरीर-मन-बुद्धी एवं ह्रदय भी आनंद की अनुभूति करता हैं। एकांत से एकात्मकता की समझ विकसित होती हैं। विश्व के धरातल पर कई मनीषीओं ने जीवन के बहुमुल्य आयामों को हांसिल किया हैं। इसके बारें में कई उदाहरण प्रस्तुत हैं। इतिहास आज भी उन महान मनुष्य के रूप में हमारें सामने जीवित हैं। ज्ञान- घ्यान, विचार-वर्तन, आजकल, जीवन-मत्यु, आनंद-शोक, करूणा-प्रेम सब अनुबंध अनुभूति और पारस्परिक व्यवहार में संमिलित हैं। ईश्वर इन सब का सृजन कर उसकी अद्भुत महानता स्थापित करता हैं। मनुष्य के रूप में उनकी ये आनन्द विश्व की सहेलगाह को एकात्मता से निभाते चलते जाना हैं !! हमारी पीड़ा- खूशी और जीवंतता के साथ।
आनन्द विश्व की सहलगाह में आपका एक छोटासा साथी डॉ.ब्रजेशकुमार 👏 9428312234
Nice article sir.
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